blogid : 9650 postid : 8

इस तरह के पुरूषों को आप क्या कहेंगे?

Posted On: 28 Mar, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

श्रेया (बदला हुआ नाम) और मैं, हम दोनों  आज से दो साल पहले किसी लोकल मीडिया हाउस में काम करते थे. पहली बार जब वो इंटरव्यू देने ऑफिस आई. तो मैं उसके बराबर में ही बैठी हुई थी. यूं तो मुझे पहली नजर में अधिकतर लोग सकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करते. लेकिन श्रेया से पहली बार हैलो कहते ही एक अपनापन महसूस हुआ, बस वही से हम अच्छे दोस्त बन गए. लगभग दो महीने तक हमने साथ काम किया क्योंकि हम काफी गहरे दोस्त थे. तो हर तरह की बात हमारे बीच शेयर होती थी. उस ही दौरान मुझे उसने अपने चार साल से चल रहे अफेयर अभिराज के बारे में बताया और दोनों ने अंत में एक दूसरे के साथ शादी जैसे बंधन में बंधने की बात भी कही. लेकिन इस ही बीच अचानक श्रेया गायब हो गई. लगातार एक हफ्ते तक उसका फोन बंद जा रहा था. मैं काफी परेशान थी, उसके आसपास के दोस्तों से पता करने की कोशिश की तो कुछ मालूम नहीं हुआ. अभी मैं उसके किराए वाले घर में जाने का मन बना ही रही थी कि देर शाम को उसकी कॉल आई और वो सिसकती हुई बोली कि अभि ने मुझे धोखा दे दिया.लगभग एक घंटे तक चली बात में उसने मुझे उस लड़के  के कायरपन और नीचता की पूरी दास्तां सुनाई. जहां एक तरफ श्रेया उस इंसान के लिए अपने घर वालों के सामने जिद्द रखे बैठी थी और उसने एड़ी तक का जोर लगा दिया था, वही उस कायर ने अपनी झूठी प्रतिष्ठा के चलते किसी ओर लड़की से शादी के लिए हां कर, दो महीने के भीतर शादी की ली. शायद अब आप लोग सोच रहे होंगे कि अभिराज की कास्ट श्रेया जैसी नहीं या फिर सामाजिक तानाबाना उन दोनों के अनुरूप नहीं था. जबकि ऐसा नहीं था, दोनों ही जाति व धर्म जैसी हर तरह की कसौटी में कुदरती खरे थे. लेकिन एक बार फिर पुरूषों को प्रधानता देने वाला समाज अभिराज की सोच पर इस कदर हावी हुआ कि उसने श्रेया के पिता को अपने आगे झुकने की बात कहीं. बस फिर क्या था, श्रेया के पिता अपने फैसले पर अडिग रहें और अभिराज अपनी झूठी ऐंठ में दूसरी लड़की से विवाह कर बस गया. आज दोनों अलग अलग विवाहित जीवन व्यतीत कर रहे है. लेकिन अभिराज की शादी के एक साल बाद अब वो श्रेया को एक्ट्रा मरीटियल अफेयर के लिए फोर्स कर रहा है. इस तरह के घटिया पुरूषों को आपकी परिभाषा क्या कहती है? जो इतने स्वार्थी है, कि अपने स्वार्थ की सिद्धी के लिए किसी की जिंदगी तक बरबाद करने से नहीं कतराते है. आज श्रेया अब तक अपने गुजरे वक्त से मिले घरवालों के सामने बेइज्जत होने के दाग से उभर नहीं पाई. बजाय माफी मांगने के, अभिराज जैसा ओछा आदमी खुद को समाज के नीचे दबा कुचला बता कर अब दोबारा रिश्ता बनाने की डिमांड कर रहा है. क्या अभिराज जैसे लोगों की आत्मा नहीं है? या उन्हें अपने किए पर शर्म महसूस नहीं होती? क्यों इस तरह के लोग लड़कियों को इंसान नहीं बल्कि सामान समझते है. जिन्हें वो अपने आराम के तहत अपनी जिदंगी में लाते और छोड़ देते है.

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (12 votes, average: 4.42 out of 5)
Loading ... Loading ...

15 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

poghal के द्वारा
April 5, 2012

ताली एक हाथ से नहीं बजती रश्मि जी .

March 31, 2012

आप खुद को समझा लीजिये. किसी दुसरे को आप क्या समझायेंगे और क्या समझेंगे आप. आज जो समाज का स्वरुप विकसित हुआ है उसका विरोध मैं भी करता हूँ. परन्तु इसका दोषी सबसे अधिक आप जैसे विचार धारा के लोग है. दो व्यक्तियों को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार हमारा भगवान, धर्म और इश्वर सभी देते है. परन्तु आप जैसे लोग उस पर अंकुश लगाकर या तो रिश्ता तोड़ने की कोशिश करते है या फिर उन्हें गलत साबित करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में चोरी छुपे वो चीज कर जाते जो उन्हें नहीं करना चाहिए. दुनिया का कोई भी धर्म हो यह स्पष्ट कहता है कि एक लड़की की मर्जी के खिलाफ उसकी शादी करना गुनाह है तो फिर आप इसे परंपरा कैसे बना लिए……यदि विरोध करना हैं तो बुराई का करिए. छिछोरा पंती और अश्लीलता का विरोध मैं भी करता हूँ…..पर आप जैसे लोग धर्म और परंपरा के नाम पर जो कर रहे है वो उससे भी गिरा हुआ काम है…..यदि नियंत्रित करना है तो अपने मन को करिए.

shailesh001 के द्वारा
March 31, 2012

हां मैं समझ रहा हूं कि अगर मैं उन लम्पट पुरुषों की तरह बोलूं तो रूढीवादी नही कहलाउंगा. पर वास्तव मे किसी को समझाया नही जा सकता. और कुछ लडकियों तो कतइ नही.. इसलिए कहते हैं मूर्खता सबसे बड़ा अपराध है. और आज के लम्पट मीडिया के बनाए झूठे समज को ही पूरी दुनिया समझने वालों को समझाना भी असंभव है कि जो धर्म समाज आपने देखा ही नहीं है वो किस किताब मे लिखा है. मतलब आज की महिला खुद को चठ चालाक समझ मनमानी करे तो वही स्वीकार कर लिया जाए. बहुत बढिया. आज के लडके ओर खासकर लडकियां खुद ही दुस्साहस करती हैं और उन्हे उसमे भी समर्थन चाहिए.. सीमा लांघने वाली ऎसी लडकियों तो कड़ी सजा मिलनी चाहिए. पर सही है आपको अभी तक लम्पट पुरुष ही मिले होंगो. और अपनी मनमानी को ही धर्म समाज संस्क्रिति समझने वालोंकी संख्या बढ गइ है और जिसे लंपंटता फैलाने वाले मीडिया से बढावा मिल रहा हैऔर हिंदी फिल्मो को जीवन मे उतारने की चाह रखने वालों को उसकी स्वीकार्यता भी चाहिए. ये अफसोस नाक है. फिल्मी दुनिया को धर्म मनने वालों को कोइ क्या बताएगा कि किस सभ्यता,युग, किताब मे क्या लिखा है . यहा कमेंट करना आपको आगाह करना था. अधिक कुछ नहीं। सही समय आएगा तो आप सही नियम पालन भी देखेंगे. तब तक आनंदकरें.. स्वतंत्रता का आनंद ले. और ये व्यक्तिगत आक्षेप नहीं है. धन्यवाद. 

shailesh001 के द्वारा
March 30, 2012

बड़े मजे की बात है आज की ये तथाकथित आघुनिक नारी खुद ही अतिदुस्साहस दिखाती है आज मीडिया की बनाई काल्पनिक कहानी का खुद को नायिका समझती है, परिवार के खिलाफ जाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझती है और जब मनमानी नहीं चलती तो इस तरीके से अजीबोगरीब व्यवहार करती है. बहुत सारी भ्रांतियां लड़कियों को दूरकरनी हैं..वो फिर कभी,        पर एक औसत लडका बिल्कुल ऐसे ही करता है.. समाज परिवार से विमुख रहने वाली ऐसे ही हल्के तौर पर देखी जाती हैं , पारंपरिक रीति से आई लडकी ही पत्नी के रूप में स्वीकार करता है.. और यही सही भी है . पर आज आसमान पर उड़ने वाली आधुनिकाएं कुख सुनना समझना नहीं चाहतीं . पर दूसरो को दोष देने मे पीछे नही नहना चाहतीं.. और ऐसी बेवकूफी के लिए कोइ सहानूभूति नही हो सकती.. हो सकता आपको ये बात कडवी लगे… पर हजारों सालों के नियमों का कुछ अर्थ तो होगा ही. और है। 

    rashmikhati के द्वारा
    March 30, 2012

    shaiesh g…aapka comment kaafi rudhiwaadi hain…. pata nai aise purush jo ki pariwaar se vimookh rehne wali ladkiyo ko halke main lete hain.. unhe aap kaise spport kar sakte hain… jaha tak rai paramparik reeti se nikli ladkiyo ki hain,unse ye purush vivah esliye karna chahte hain.. taaki bhale he vo khood kitne bhi ghatiyaa ho.. lekin logo ke saamne khood ki pasand ko sanskari dikhaane ka dhong karte hain.. jabki es tarah ke purush is samaj ki vo saddi hui jadh hain jisse humare samaj ki kuch ladkiya chahkar bhi aage nai badh paa rai…agar aapki paribhasha main pariwarik mahol main rehne se he ladkiyaa susanskaari hoti hain.. toh main bhagwaan ki sukrgujaar hoo..ki har purush aisa nai soachta.. chahe vo pita ho, bhaai ho ya phr koi pati…humare samaj ke kuch aadmi khood ko sarvesarvaa samjhte hain.. jise shaadi se pehle just for fun ke liye khule vichaaro ki ladki. shaadi ke liye ghareloo ladki…or jab kuch saalo baad usse man oob jaye toh phr xtra maritial affair chalane ke or independent ladki chaheye.. or agar en main ek bhi apne saath us vyakti ke riste ka adhikaar maange..toh inhe lagtaa hain ki hey raam maine toh susheel ladki kaha thaa.. ye chant chalaak kaha se aa gai.

    March 31, 2012

    आप बुरा न मानियेगा शैलेश जी. क्या आप बताएँगे कि सिर्फ arrange maariage करने का नियम जो बना हैं किस युग, किस सभ्यता और किस किताब में इसका उल्लेख हैं…..आज कल जो लड़का और लड़की एक दुसरे के साथ धोखा करते हैं उसका कारण काफी हद तक अआप जैसी सोच्वाली विचारधारा है जो उन्हें मजबूर करती है ऐसा करने के लिए और अंत में उन्हें ही दिशी ठहरा देती हैं…….आप एक बार अपने अन्दर झक कर देखिएगा और खुद को बताइयेगा कि आप कितना परम्पराओं का निर्वाह किये हैं…….अच्छा होने और अच्छा बनने में अंतर होता है……

March 28, 2012

आपकी सहेली की आप बीती और हमारे कुछ ब्लोगर भाइयों की प्रतिक्रिया पढ़ी. आपने जो सवाल किया है उसका जवाब तो देना नहीं चाहूँगा. यदि आप मुझसे जवाब चाहती है तो वह मेरे लेखों और कृतियों में मिल जायेगा. परन्तु जो भाई लोग यह बोल रहें है कि आपकी सहेली में हिम्मत नहीं कि उसके मुंह पर दो चांटा मारे या थूक दे. एक समय के लिए उनसे कहूँगा कि एक बार आप उस लड़की के जगह पर खुद को रखकर सोचिये. आपका जिसके साथ अफेयर हो ओर वो बोले कि मेरे साथ फिर से रिश्ता कायम करों नहीं तो तुम्हारे पति और उसके घरवालों के बता देंगे तो इस स्थिति में आप क्या करेंगे. यदि मान लीजिये कि आप खुद अपने पति को जाकर बता देते तो अब आप उस औरत के पति की जगह खुद को रखकर बताएं कि अपनी पत्नी के बारे में इतना सब सुनकर आप उसे पहले की भांति मान-सम्मान, प्यार दे पाएंगे. अब आप उस औरत की मज़बूरी को को समझ सकते है जो सामाजिक बन्धनों के साथ घिरी हुई है , हरेक जगह उसको खुद को बचाना ही पड़ता है. आइये एक औरत की मज़बूरी को एक उदहारण से समझा जाये…….छुरी चाहें खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर. हरेक हाल में कटना तो……………..! क्या समझे…. जय हो भारतीय सभ्यता और संस्कृति की जहाँ लोग एक तरफ औरत को देवी और माँ की संज्ञा देते है और दूसरी तरफ वास्तविक जीवन में……………….हां……हां…..हां…..! मजा आया……! तो एक बार प्रेम से बोलिए भारत माता की …….जय! भारतीय संस्कृति की…….जय!……..बस-बस अब हमारा देश ओर हमारी संस्कृति महान हो गयी …………….अब हम सभी स्वतंत्र है अपनी माँ-बहनों को ………………………………जय हो, जय जय हो

yogeshdattjoshi के द्वारा
March 28, 2012

हर इन्सान एक सा नहीं होता और यही समाज है. चाहकर और न चाहकर भी हमें इसी में ही रहना है. गलत आदमी को सजा मिलनी चाहिए पर वह सजा जो उसको प्रभावित करे ना की उसके परिवार को. साथ ही यह भी जरुरी है की सजा से उसे नई रह मिले और वह वो पुराना गलत रास्ता त्याग दे. अगर एक लड़के को मौत की सजा हो जाती है जो की माँ बाप की इकलोती संतान है तो यह सजा किसकी है उस माँ बाप की जो उनकी एक मात्र संतान है या उस लड़के की जिसने एक अपराध किया है. …… हर छोटी छोटी बात को तूल देना भी गलत है छोटी मोटी चीजो को नजरंदाज कर देना चाहिए, हा अगर यह दैनिक है तो जरुर कोई न कोई समाधान होना चाहिए….

prateekraj के द्वारा
March 28, 2012

प्यार कोई आसान सा खेल नहीं है जिसे कुछ देर खेलकर बाद में बंद किया जा सके.अगर आपकी उस मित्र को इतनी बड़ी कमिटमेंट में पढने से पहले समझदारी से काम लेना चाहिए था. जो लोग गलत होते हैं,उन्हें पहचान कर उनसे बचना ही सही है. अगर आप उन्हें न पहचानने की गलती करेंगे तो फिर खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा. अब जबकि उनके साथ ऐसा हो ही गया है तो फिर वो अब उस आदमी को अपने पास क्यूँ आने दे रही हैं.अगर वो चाहता भी है तो क्या आपकी दोस्त में इतनी हिम्मत नहीं है जो वो उसे न कह पाए.वो उस आदमी की जागीर नहीं हो सकती की जैसा चाहे वैसा व्यवहार करे.पर प्यार में गलत इंसान को चुनने पर गलती हमारी भी होती है. अब आपको चाहिए की आप अपनी दोस्त को समझाएं. all the best.

    yogeshdattjoshi के द्वारा
    March 28, 2012

    मुझे आपका सुझाव अच्चा लगा. एक बार गलती माफ़ की जा सकती है. एक दूसरा मौका भी दिया जा सकता है अगर आप चाहे तो पर अगर तीसरा मौका अपने दिया तो समझदार वो नहीं जो आपको बेवकूफ बना गया बल्कि ये आपकी बेवकूफी होगी.

yamunapathak के द्वारा
March 28, 2012

आज के युग का सबसे बड़ा तकाजा है की वे इंसान को अची तरह समझने की कोशिश करें स्कूल की शिक्षा के साथ-साथ अपने बड़ों के अनुभव ज़रूर सुने,वे अपने तजुर्बे से आपकी राहें आसान कर देते हैं. आपका यह लेख हर युवा लडकी को पढ़ना चाहिए पर एक बात और सभी इस तरह नहीं होते.

March 28, 2012

वो लड़की जो भी है, आपकी दोस्त है ना.., उसे कहिए वो थूक आए एक बार उसकी मुंह पर और हो सके तो कहीं सार्वजनिक जगह पर तमाचा भी जड़ आए…, ताकि उस नीच को थोड़ी शर्म महसूस हो। वैसे बात पुरुष की नहीं व्यक्ति और उसकी मानसिकता की है। सामान्यीकरण सही बात नहीं।

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 28, 2012

मेरा बस चले तो उन्हें चौराहे पड़ खड़ा कर के दो जूते मरुँ. पता नहीं व्यक्ति की सोच क्या हो गया है? न कोई चरित्र है न कोई नैतिकता है.

follyofawiseman के द्वारा
March 28, 2012

“““““““jdfhgil4ejk\\\\\\rfgvtu 35tol. kwerhioewrhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh wioehrjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjnoiwernl[;’..;”’./’.;’. werwehoeirthoirtyhioeryhy k;lkl;jertoreyj oeitujioertujeriot iejhrtioh kfioertjhijyhpryhrt

    yogeshdattjoshi के द्वारा
    March 28, 2012

    अपने कटु शब्दों में बहुत निंदा की है जो काफी हद तक सही है. एक ही चीज को बार बार कहना सही नहीं है. पर दोस्त कुछ ज्यादा ही कटु है. इतने भी निर्दयी बनो यार.


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran